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लेखनी प्रतियोगिता -09-Jan-2023 आधे अधूरे रिश्तौ को श्रद्धान्जलि

                अधूरे रिश्तौ को श्रद्धान्जलि

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            छोटे भाई विशाल  का मृत शरीर आखिरी यात्रा की चलने की राह  था लेकिन उसी समय उसकी बहन रश्मि ने छोटे भाई के शरीर को उठाने से पहले जायदाद में हिस्से की मांग  की बात कहकर अर्थी ले जाने से साफ इंकार कर दिया जबतक जायदाद में  मेरा हिस्सा नही दोगे तबतक ये शरीर नही ले जाने दूंगीं ।


        अनेकों रिश्तेदारों व आसपास के पडोसियों ने रश्मि को  समझाने की बहुत  कोशिश की मगर वह अपनी जिद पर अडी रही।


              वहाँ उपस्थित सभी रिश्तेदार    सभी थू थू कर रहे थे कि है भगवान  ऐसी बहन किसी को ना दे। कितनी स्वार्थी है और भी ना जाने कितनी कंटीली बातें कह रहे थे मगर रश्मि तो जैसे एक ही रट लगाए थी उसे पहले हिस्सा चाहिए वरना छोटे की अर्थी उठाने नही दूंगी।

             मृत छोटे भाई की पत्नी बडी बहन के पेरों मे गिरकर रोते हुए बोली  ,"दीदी  इनहोने आपको हमेशा बडी बहन नही एक मां के रुप मे मान दिया स्वयं आप भी तो इन्हें और मुझे बेटा बहु स्वरूप मे मानती आई है इनकी मिट्टी खराब ना कीजिए! अब इन रिश्तौ का मान रखलो।
 
           " भाभी  !तुम छोटे के जीवित रहते भी मेरी बहु थी और वो मेरा बेटा था। अब   आगे भी वही रिश्ता कायम रहेगा !   जैसे वह मेरी आज्ञा मानकर कुछ ना कहते चुप हो जाता था आप भी ना कहते चुपचाप अलग खडी रहो। मैं जो कर रही हूँ मुझे रोको मत। मैं हिस्सा लिए बगैर छोटे की मिट्टी नही जाने दूंगी बस मेरी यह जिद तो पूरी करनी ही होगी। " रश्मि ने दो टूक जबाब दे दिया।

             आखिरकार उसकी जिद के आगे घुटने टेक वकील को बुलाया गया ।    जायदाद में उसका हिस्सा होने की कार्यवाही होने के बाद ही अर्थी ले जाई गई।

                क्रिया कर्म की सारी प्रक्रिया समाप्त होने पर पिताजी और बडा भाई भाभी रश्मि पर बरस पडे।
       उसके पिता बोले ,"  यही संस्कार दिए थे हमने कि शादी के बाद जायदाद में हिस्सा ले ? और सुन  !  अब हिस्सा मिल गया है तो तुझसे हमारा जीवन भर का  रिश्ता भी  खत्म  हो गया समझी ? "

           "इतना सुनकर रश्मि  नम आँखों से बोली,"    पापा आपने तो हम दोनौ भाई बहिन से रिश्ता  रखा ही कब था ?   जीते जी तुम छोटे भाई ,भाभी के साथ गैरों की तरह व्यवहार करते रहे सिर्फ इसलिए की उसने एक अपनी पसंद की लडकी से शादी कर ली  थी ।आप लोगों को इसके चलते मनमुताबिक दहेज जो नही मिला  था।  दिनरात ताने दे देकर जाने उन दोनों से क्या क्या  नही कहा हर मुमकिन कोशिश की थी कि छोटा अपनी पत्नी को छोड दे ताकि आप लोगों की दहेज लोभी इच्छाओं को पूरा करने की अवसर मिल सके ।  लेकिन  वह नही माना आखिर अपनी पत्नी बच्चों के लिए मेहनत करते करते वो बीमार हो गया।      आप लोगों ने तो उसे बिल्कुल अछूत कर दिया । जीते जी आप उसे और उसकी पत्नी बच्चों को भूखों रख सकते हो, तो उसके मरने के बाद भाभी और दो छोटे बच्चों के साथ ना जाने कैसा व्यवहार करोगे।  और रही बात जायदाद की तो वो मैंने अपना हिस्सा  छोटी भाभी के नाम लिख दिया है ।"  इतना कहकर रश्मि  कागजात भाभी को देकर  चलने लगी । 

          उसकी छोटी भाभी उसे समझ नही सकी थी कि वह यह नाटक क्यौ कर रही थी ।छोटी की समझ में अब सब कुछ आचुका था।
           रश्मि ने जब मुड कर देखा छोटा भाई फूलमाला पहनी हुई तस्वीर में से मुस्कुरा कर कह रहा हो कि बहन तूने आधे अधूरे रिश्तौ को  सच में तूने आज पूरा करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया  है।  और मेरे तिनके जैसे बच्चों के लिए सहारा बन जो फर्ज आज तूने निभाया है उसका बदला मै अगले जन्म में अवश्य निभाने की कोशिश करूँगा।

           रश्मि के इस नये रूप को देखकर वहाँ उपस्थित सभी रिश्तेदारौ व लोगौ ने रश्मि को मन ही मन धन्यवाद दिया ।और सोचने लगे कि विशाल को असली श्रद्धान्जली तो बडी़ बहिन ने दी है।


 आज की प्रतियोगिता हेतु रचना।

नरेश शर्मा " पचौरी"

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8 Comments

प्रिशा

04-Feb-2023 07:40 PM

Very nice

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Mahendra Bhatt

13-Jan-2023 10:21 AM

शानदार

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अदिति झा

12-Jan-2023 04:13 PM

Nice 👍🏼

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